# कल्पना — शब्दों के बीच

> कल्पना पाण्डेय की हिन्दी कविताओं और मन की रचनाओं का स्वतंत्र, कालक्रमिक और लेखक-अधिकृत संग्रह।

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## नवीन रचनाएँ

- [हम लोहा हैं](https://kalpana.live/poems/kavita-28): 2026-07-23 — हम लोहा हैं .... बस नुक्स ये है कि घुस जाते हैं दरार हो या दयार More power to Bhavya Pandey SBS हिंदी मेलबोर्न…
- [लोक डर रहे](https://kalpana.live/poems/2026-07-16-rachna-788): 2026-07-16 — लोक डर रहे
तंत्र डरा रहा
लोकतंत्र
 दिशा हीन
गरिमा विहीन  हुआ

आप अमूल्य हो सोनम वांगचुक जी
मनुष्यता आप से है।
…
- [माफ़ी एक कड़वी औषधि](https://kalpana.live/poems/kavita-24): 2026-07-15 — माफ़ी एक कड़वी औषधि है

जो माफ़ कर देने वाले पर ज्यादा असर करती है।

उस मिठास का कोई जवाब ही नहीं।
- [दो बुलबुले](https://kalpana.live/poems/kavita-19): 2026-07-12 — दुःख जितना मुस्कुराता है सुख बस उतनी ही देर तक कामिल रहता है।

दो बुलबुले
 दोनों अभागे।
- [जब प्रश्न आँखों में](https://kalpana.live/poems/kavita-20): 2026-07-12 — जब प्रश्न आंखों में छिपा हो तो उत्तर अधरों में ढूंढना चाहिए।
- [विराम चमकदार होने चाहिए](https://kalpana.live/poems/kavita-18): 2026-07-07 — हम विराम से चलकर विराम तक पहुंचते हैं।
इन विरामों को गिनना दुख है और नकार देना सुख।
विराम से विराम तक कुछ छूटे…
- [एक अद्भुत विस्थापन](https://kalpana.live/poems/kavita-17): 2026-07-03 — बस नहीं चलता
हवा
पानी
दुःख
उदासी
 प्रेम
 मन और ईश्वर पर

 रुको
 रुके रहो
विराम ऐसे ही लगेगा।
स्व स्थगित होकर ई…
- [प्रेम सदा से अधिकार रहा](https://kalpana.live/poems/kavita-15): 2026-06-19 — प्रेम सदा से अधिकार रहा....
दिया गया
लिया गया
खो दिया गया
त्यागा दिया गया
और कभी कभी यूं ही औचक मिल गया।
- [हम कब पुराने हो गए](https://kalpana.live/poems/kavita-13): 2026-06-17 — उम्र के इस पड़ांव पर जाना कि पुराना सही नया गलत हो सकता है और नया सही पुराना गलत।

ये लगता एक जैसा है पर इसमें…
- [जीवन काँच है](https://kalpana.live/poems/kavita-14): 2026-06-17 — जीवन काँच है
तराश आएगी तो किनारे भी टूटेंगे और दरार भी आएगी
पर तुम बनाए रखना किरदार।
- [चेहरे में दुनिया](https://kalpana.live/poems/kavita-12): 2026-06-12 — कोई दुनिया में चेहरा देखता है
कोई चेहरे में दुनिया
तू कहां ?
तेरी देख कितनी?
- [तुम्हारी दुनिया](https://kalpana.live/poems/kavita-11): 2026-06-10 — तुम्हारी दुनिया में मैं नहीं मेरी दुनिया बस तुम सही विदा में प्रेम हो या प्रेम में विदा जाना बस मुझे है और रुक…

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