कल्पनापूरा संग्रह

रचना 90 / 789

हमारे बीच कुछ भी तो नहीं

हमारे बीच कुछ भी तो नहीं... न साथ न शब्द न स्पर्श मैंने उससे कहा हमारे बीच संभावना तो है ... ये कह कर उसने एक बार फिर मुझे निःशब्द कर दिया। *तस्वीर में एक मैं तो मुस्कुरा रही ...उसका पता नहीं😊

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह