कल्पनापूरा संग्रह

रचना 118 / 789

क्या हम प्रेम में ज्यादा मांगते हैं

क्या हम प्रेम में ज्यादा मांगते हैं ? हमेशा देखती हूं... हम गलत से सही मांगते हैं और सही से गलत हम गलत से गलत भी मांगते हैं और सही से सही भी इस प्रेम *मांगने* में हम सही खुद को अमूमन गलत करते जाते हैं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह