कल्पनापूरा संग्रह

रचना 123 / 789

"प्रेम ,रूप,गंध,दुःख और कविता ये सभी द्रव्य शब्द हैं

"प्रेम ,रूप,गंध,दुःख और कविता ये सभी द्रव्य शब्द हैं जहां रख दो ....छलकेंगे तुम में मुझ में भी इनकी क़ैद ... इनकी सलाखें बनी नहीं। मैं और तुम इनके लिए एक मर्तबान बन सकते हैं। यह ईश्वर कहता है...मुझसे

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