कल्पनापूरा संग्रह

रचना 132 / 789

ये दुनिया *हां* से चलती है

ये दुनिया *हां* से चलती है... एक प्रेम ही है जो *ना* से भी चलता चला जाता है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह