कल्पनापूरा संग्रह

रचना 139 / 789

तुम जाने किसके हो पर तुम्हारी आंखें यकीनन मेरी हैं।

तुम जाने किसके हो पर तुम्हारी आंखें यकीनन मेरी हैं। दो दिन दो रंग दो लोग एक जैसे हो ही नहीं सकते ... पर हम थे। याद कीजिए।

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