कल्पनापूरा संग्रह

रचना 141 / 789

जब तक प्रश्नों से प्रश्न बनते रहेंगे तुम प्रेम में पड़ ही…

जब तक प्रश्नों से प्रश्न बनते रहेंगे तुम प्रेम में पड़ ही नहीं सकते हमको उत्तर का उत्तर बन जाना ही प्रेमिल रखेगा। जब प्रश्न सूख जाएं और उत्तर डूब जाएं प्रेम तर जायेगा हमारे बीच ईश्वर ने आज फिर इशारा करके प्रश्न बुझा दिए और उत्तर मिटा दिए। हम तीनों हंस दिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह