कल्पनापूरा संग्रह

रचना 157 / 789

आधे से ज्यादा शब्द तो तुम सोख लेते हो चाँद

आधे से ज्यादा शब्द तो तुम सोख लेते हो चाँद .... ये जो तुम्हारे चेहरे पर दाग हैं .... ये मेरे ही अक्षर हैं जिन्हें लीपा है मैंने तुम पर ... अकेले इस रात को घंटों जलाकर यकीन न हो तो मेरी डायरी से पूछ लो ......

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह