कल्पनापूरा संग्रह

रचना 162 / 789

मान लेने और मना लेने में प्रेम की मात्रा देखिये

मान लेने और मना लेने में प्रेम की मात्रा देखिये.... मन की नहीं..... दो न्यून मिलकर ही एक अगाध रच सकते हैं। शुभ दिन 💕

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