कल्पनापूरा संग्रह

रचना 189 / 789

जिसको मन थमाओ उससे प्रश्न पूछना

जिसको मन थमाओ उससे प्रश्न पूछना... पूछना कि दस्तक खाली क्यों गई? अगर बयार बही तो पत्ते क्यों नहीं हिले? उन पलों का क्या हुआ जो आंच की नमी में सील गए? स्पर्श की डोर क्यों टूटी ? याद की श्यामातुलसी क्यों झुलस गई? बिछोह में मेरे मनके किधर लुढ़के? लूटना और लुटना में मात्रा का नहीं... मात्रा का फ़र्क है! *कहानियों का क्या है..... कहीं भी उग आती हैं। प्रेम थोड़े ही है जो दब जाएगा।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह