कल्पनापूरा संग्रह

रचना 228 / 789

आज इतने बरस हुए @कल्पना लाइव को। आज फिर महक उठी। मेरे विद्य…

आज इतने बरस हुए @कल्पना लाइव को। आज फिर महक उठी। मेरे विद्यार्थी अनय की मां जो खुद एक मनोवैज्ञानिक हैं और लेखिका भी शायद मेरा लिखा wapp स्टेटस में पढ़ती रहीं होंगी। उन्होंने ptm में आकर मुझसे मेरी किताब मांगी और उसका मूल्य देकर मेरी कला को मान दिया। यही सब देख कर लगता है लिखना सुख है। आप मन जीत लेते हो। लिखना आपको पास और पास ले जाता है ... कभी अपने ... कभी आप सब के भी। स्नेह बरसता रहे। मेरी लेखनी में आप सब की ही चाशनी घुली है। शुक्राना सदा रहेगा। आप का बहुत शुक्रिया maam।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह