कल्पनापूरा संग्रह

रचना 253 / 789

खुद से बहुत कम बात होती है अब

खुद से बहुत कम बात होती है अब... पर तुम वहां भी होते हो। *कीमत* नहीं मुझे हमेशा *कीमती* शब्द ने मोहा है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह