कुछ रंग खुरचकर भी निकलते... तुम मेरा वही प्रीत रंग हो। बस लग गए हो।
रचना 255 / 78918 अक्टूबर 2023कुछ रंग खुरचकर भी निकलते✣कुछ रंग खुरचकर भी निकलते... तुम मेरा वही प्रीत रंग हो। बस लग गए हो।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह