कल्पनापूरा संग्रह

रचना 289 / 789

मेरे आंख का गीलापन साक्ष्य है कि तुम बंजर हो नहीं सकते मेरे…

मेरे आंख का गीलापन साक्ष्य है कि तुम बंजर हो नहीं सकते मेरे लिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह