तुम्हें देखती ,सुनती, पढ़ती हूं तो लगता है *एक* का कितना म…
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तुम्हें देखती ,सुनती, पढ़ती हूं तो लगता है *एक* का कितना महत्व है । *एक* को कितना तो चाहा जा सकता है ..... *एक* में कितना तो अनंत रहा जा सकता है। कितनी देर तक तका जा सकता है वो *एक* कितनी तरह से लिखा जा सकता है वो *एक* तुम सा प्यारा फूल कभी नहीं हुआ....एक पंखुरी वाला
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह