कल्पनापूरा संग्रह

रचना 291 / 789

तुम्हें देखती ,सुनती, पढ़ती हूं तो लगता है *एक* का कितना म…

तुम्हें देखती ,सुनती, पढ़ती हूं तो लगता है *एक* का कितना महत्व है । *एक* को कितना तो चाहा जा सकता है ..... *एक* में कितना तो अनंत रहा जा सकता है। कितनी देर तक तका जा सकता है वो *एक* कितनी तरह से लिखा जा सकता है वो *एक* तुम सा प्यारा फूल कभी नहीं हुआ....एक पंखुरी वाला

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह