कल्पनापूरा संग्रह

रचना 368 / 789

जीवन बचा रहा तो एक रोज़ तुम्हारी मासूमियत से मिलना है

जीवन बचा रहा तो एक रोज़ तुम्हारी मासूमियत से मिलना है... मुझे उसने तुमसे ज्यादा बर्बाद कर रखा है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह