कल मैं अपने विद्यालय से रिलीव हो जाऊंगी। आज मेरे सहयोगी अमि…
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कल मैं अपने विद्यालय से रिलीव हो जाऊंगी। आज मेरे सहयोगी अमित ने मुझे ये कहते हुए अपने उद्गार व्यक्त किए कि maam आपको पढ़ने का शौक है और मेरी नजर में इससे अच्छा उपहार आपके लिए हो नहीं सकता। आप जैसा हो सकता है पर आप नहीं हो सकता कोई। सम्मान वस्त्र लाए थे। पहन कर मुस्कान भी आई पर मन भीग गया। अंकित का साथ मेरे बीते दो सालों में शानदार रहा। मुझसे कई साल छोटा है पर जीवन सूत्र मजबूत रखता है। आत्म सम्मान पर चोट लगने लगे तो प्रहार उलट कर करना ही चाहिए। मौन होकर कौन हो जाने से बेहतर है *मन कहना* । अंदर उगने वाले प्रश्नों का जवाब भले ही भीतर मिले पर गूंज दूर तक जानी ही चाहिए। मैंने बहुत कुछ सीखा है साथ। मेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलने और थामने का शुक्रिया। जब भी याद करोगे ... मैं रहूंगी। हमेशा का बंधन बांधा है। जीते रहिए।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह