कल्पनापूरा संग्रह

रचना 489 / 789

जताने और बताने का फ़र्क प्रेम के हिस्से अक्सर आया।

जताने और बताने का फ़र्क प्रेम के हिस्से अक्सर आया। मेरा प्रेम कश लगाता रहा । दिल वाली नस दबाता रहा।

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