कल्पनापूरा संग्रह

रचना 496 / 789

उदासी उत्सव है

*उदासी उत्सव है ... बस मन मनाता है। *ठूंठ से किया करो प्रेम कि बहार का न सुख दिखे न पतझड़ का दुःख। कम देखो कम दिखो कि एक सरीखा रहे प्रेम .... सुंदर ,सरल, सदा तुम्हारी तरह *तीन अक्षर की "उदासी" ... दो अक्षर "तुम " और कभी कभी ... एक अक्षर "मैं" से भी बन जाती है। है ना जादू?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह