कल्पनापूरा संग्रह

रचना 498 / 789

तुमसे जो कुछ भी है

तुमसे जो कुछ भी है जितना कुछ भी है जैसा कुछ भी है आधा अधूरा अच्छा है । अपूर्ण का अतिरिक्त अक्षर पूर्ण पर लगा हुआ दाग नहीं आस है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह