कल्पनापूरा संग्रह

रचना 572 / 789

कितना कहा Monodeep से ऊपर बैठ कर बना लो।नहीं माना।कहने लगा…

कितना कहा Monodeep से ऊपर बैठ कर बना लो।नहीं माना।कहने लगा जमीन पर बैठ कर ही बनाता हूं। Rachna Singh mam कल हमारे विद्यालय से लाइब्रेरियन के रूप में करीब ३७ साल की सेवाओं के बाद सेवानिवृत हुईं।उनके लिए Monodeep ने अपने उद्गार इस पोट्रेट के रूप में व्यक्त किए। स्नेह तुमको बेटा।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह