कल्पनापूरा संग्रह

रचना 617 / 789

लोग छूटते गए

लोग छूटते गए... कुछ मृग थे कुछ तृष्णा कुछ मृगतृष्णा शेष जो बचा वो प्रेम था,मैं थी और मेरा एकांत था।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह