कल्पनापूरा संग्रह

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बिना राह का प्रेम

बिना राह का प्रेम प्रेम की राह बिना। एक दिन तुम मेरे प्रेम से नहीं, मेरे प्रेम की बर्दाश्त से डर जाओगे। इक ग्लानि से कि किसको दुखाता रहा इतने बरस , तुम सो न पाओगे। बरसों इंतजार के बाद मैं एक बार फिर देखूंगी तुमको निर्भीक जैसे पहली बार देखा और फिर कभी न बन सकी ऐसी देख। फिर एक बार वही कहूंगी ... मुझे तुम चाहिए। तुम टूट जाओगे फिर इक बार। इस बार थोड़ा अधिक। इस फेर ईश्वर मध्य होगा हमारे और तुम रद्द न कर सकोगे मेरे प्रेम को इस प्रतीक्षा को। बरबस छू कर कहोगे रहना सदा। मैं कहूंगी सदा।

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