कल्पनापूरा संग्रह

रचना 676 / 789

अक्षर ....अल्फाज़

अक्षर ....अल्फाज़ नज़्म ....ग़ज़ल किस्से ......कहानियां नग्में ....रुबाइयाँ सफ़हे.... किताबें जश्न में डूबे हैं आज ऐसे भी भला मुस्कुराता है कोई ? ऐसे भी भला जिलाता है कोई ? सुन कलम ! कुछ पल मेरी स्याही को गुलज़ार बख्श दे। 💐💐💐💐💐💐 जन्मदिन मुबारक आपको

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