कल्पनापूरा संग्रह

रचना 684 / 789

पंख प्रेमियों के भी होते हैं

पंख प्रेमियों के भी होते हैं अदृश्य अद्भुत आंख मूंद कर उड़ जाने वाले एकांत में ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह