कल्पनापूरा संग्रह

रचना 708 / 789

फिर एक दिन जो प्रेम नहीं बदल सकता प्रार्थनाएं बदल देती हैं।

फिर एक दिन जो प्रेम नहीं बदल सकता प्रार्थनाएं बदल देती हैं। ईश्वर ये सच जानता है इस लिए प्रेमी कम प्रेम ज्यादा रचता है। बहुत कुछ और बहुत सारा देख लेने के बाद का इत्मीनान हो तुम । एक तसल्ली कि गलत नहीं हूं मैं। तुमसे प्रेम वजह है मेरे होने की। फिर फिर होते रहने की। एक तुमसे है बैर इश्क वाला बैर।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह