कल्पनापूरा संग्रह

रचना 710 / 789

तुम्हारी अनुपस्थिति को खुद से भर दिया है।

तुम्हारी अनुपस्थिति को खुद से भर दिया है। देखो ....कहां नहीं हो तुम।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह