तुम्हारी अनुपस्थिति को खुद से भर दिया है। देखो ....कहां नहीं हो तुम।
रचना 710 / 78927 नवंबर 2025तुम्हारी अनुपस्थिति को खुद से भर दिया है।✣तुम्हारी अनुपस्थिति को खुद से भर दिया है। देखो ....कहां नहीं हो तुम।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह