कल्पनापूरा संग्रह

रचना 712 / 789

जिंदगी बस इतनी भर है कि देखो ,मुस्कुराओ और आगे बढ़ जाओ।

जिंदगी बस इतनी भर है कि देखो ,मुस्कुराओ और आगे बढ़ जाओ। कभी पीछे देखो तो पुराने खुद के लिए हवा में चुम्बन उछाल दो कि थोड़ा ज्यादा केंचुली उतरी । थोड़ा अधिक मनुष्य हुए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह