कल्पनापूरा संग्रह

रचना 350 / 789

समंदर के हक़दार

समंदर के हकदार को बूंद और बूंद के हकदार को समंदर देते हैं। प्रेम सबसे खूबसूरत मूर्खता है और प्रेमी सबसे सुलझे मूर्ख