प्रेम को प्रेम नहीं उसकी नम्रता सींचती है। पीड़ को पीर कभी न कहना।
रचना 96 / 78924 अगस्त 2023प्रेम को प्रेम नहीं उसकी नम्रता सींचती है।✣प्रेम को प्रेम नहीं उसकी नम्रता सींचती है। पीड़ को पीर कभी न कहना।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह