कल्पनापूरा संग्रह

रचना 95 / 789

मैं प्रश्नों से ही अपना श्रृंगार कर लेती हूँ

मैं प्रश्नों से ही अपना श्रृंगार कर लेती हूँ.... ठीक कहते थे तुम ..... मेरा कोई जवाब कहाँ ?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह