कल्पनापूरा संग्रह

रचना 94 / 789

प्रेम वो रेशम है जिसमें जंग नहीं लगती

प्रेम वो रेशम है जिसमें जंग नहीं लगती और वो लोहा भी जिसमें गांठ नहीं लगती। *तस्वीर भव्या की है जो याद में बनी रहती है।बेटियां मुस्कुराती हुई दिव्य लगती हैं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह