कल्पनापूरा संग्रह

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खुद को नेपथ्य पर रखना कहाँ ठीक है

खुद को नेपथ्य पर रखना कहाँ ठीक है? स्वयं का उफ़ान ज़ाया हो जाता है। मैं श्वास लेती जीव हूँ रक्स को आतुर पृथ्वी महसूस लेगी मेरी धड़कन तुम बजाओ तो सही बीन

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह