कल्पनापूरा संग्रह

रचना 107 / 789

"जब दुनिया छोटी हो रही होगी

"जब दुनिया छोटी हो रही होगी .... मैं और तुम तब भी उसे प्रेम करते हुए उल्टी तरफ़ धकेल रहे होंगे । यह यकीन मैं मृत्यु को जीते जी देना चाहती हूं।"

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह