कल्पनापूरा संग्रह

रचना 106 / 789

इतना लिखने दिखने बता देने के बावजूद लोग मेरे बारे में कुछ न…

इतना लिखने दिखने बता देने के बावजूद लोग मेरे बारे में कुछ नहीं जानते। मैं कयास के "क" पर अपनी नोंक रखती हूं। मैं बस अपने लिए अजनबी नहीं हूँ.... बाक़ी सब मेरे होने की हाँ में हाँ मिलाते हैं। मेरी हाँ बस मुझमें रहती है वो किसी मन को दिख नहीं सकती। मैं एक निश्छल छल हूँ ... *इबादत का सानु सिला मिल गया है।कविता सेठ जी की आवाज़ ...अहा

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