कल्पनापूरा संग्रह

रचना 113 / 789

शब्दों से इमरोज़ तो बहुत मिल जाते हैं

शब्दों से इमरोज़ तो बहुत मिल जाते हैं ... पर अमृता वाला इमरोज़ तो फिर हुआ ही नहीं .... जैसे इमरोज़ वाली अमृता फिर कभी नहीं हुई .... जन्मदिन मुबारक अमृता जी .... इश्क़ मुबारक .... इमरोज़ मुबारक.... ******** क्योंकि मैंने कभी मौन नहीं चुना ... हर बार मन चुना .....मैं अमृत हो गई । मेरे इमरोज़... तुमने हर बार मेरे मन को मान दिया इसलिए तुम्हारी अमृता हो गई .... सब्र मुबारक इमरोज़ ... अमृता मुबारक

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह