कल्पनापूरा संग्रह

रचना 114 / 789

हम पीछा करने में महारथी लोग हैं

हम पीछा करने में महारथी लोग हैं..... नाम ...काम परछाई...गहराई चाहना...कामना हुनर...सिफ़र ख़ब्त...मुहब्बत आवाज़ ..…परवाज़ कूँची...पूंजी सुख...दुःख रूप ...धूप अर्श ...स्पर्श शब्द ....प्रारब्ध सब को चूम कर छोड़ देते हैं। हम ऊबे हुए लोग फुदकते रहते हैं। दौड़ते कहाँ हैं?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह