एक प्रेम ही है जो थकान और ऊब से परे है ।ऐसा पारस जो आपके…
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एक प्रेम ही है जो थकान और ऊब से परे है ।ऐसा पारस जो आपके बोझिल यथार्थ को भी छू दे तो आप महक उठें। धरती की धुरी है प्रेम । यथार्थ उसकी परिक्रमा में रहने वाली कक्षा का अंश भर।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह