कल्पनापूरा संग्रह

रचना 121 / 789

होने और हो जाने के बीच का अंतराल प्रतीक्षा नहीं सब्र है।

होने और हो जाने के बीच का अंतराल प्रतीक्षा नहीं सब्र है। इस अंतराल को हँस कर छोटा और दुःख कर बेहिसाब किया जा सकता है। सब्र सूखे फूल से बना गुलकंद है। समझ से परे

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