कल्पनापूरा संग्रह

रचना 129 / 789

इतना प्रेमी तो तुझे कर ही दूँगी कि मैं इधर मुस्कुरा दूँ तो…

इतना प्रेमी तो तुझे कर ही दूँगी कि मैं इधर मुस्कुरा दूँ तो उधर तेरे होंठ भी हिलें।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह