बंद अधरों और रुके कदमों से प्रेम तुम तक पहुंचता कैसे है ? म…
✣
बंद अधरों और रुके कदमों से प्रेम तुम तक पहुंचता कैसे है ? मैंने उससे पूछा तुम सांस हो कल्पना.... जिस्म को लग गई हो। ये मैंने ही सुना। कहा थोड़े ही उसने।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह