कल्पनापूरा संग्रह

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बंद अधरों और रुके कदमों से प्रेम तुम तक पहुंचता कैसे है ? म…

बंद अधरों और रुके कदमों से प्रेम तुम तक पहुंचता कैसे है ? मैंने उससे पूछा तुम सांस हो कल्पना.... जिस्म को लग गई हो। ये मैंने ही सुना। कहा थोड़े ही उसने।

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