कल्पनापूरा संग्रह

रचना 144 / 789

प्यास सागर के पास न जाएगी तो कहाँ जाएगी? जो पास जाए वही देन…

प्यास सागर के पास न जाएगी तो कहाँ जाएगी? जो पास जाए वही देने की औकात रखता है। सागर प्यास को क्या पहचान देगा? वो उसकी खुश्बू तक तो पहचानता नहीं। प्यास खुद में एक पूर्ण सागर है। सागर की पूर्णता पर पत्थर प्यास ही रख सकती है। प्यास का गुनाह ही ये है कि उसे सागर पर प्रेम आ गया है। वो सागर को सूखता देख कर एक बार तो उस की होने तक इंतज़ार करेगी। सागर को प्यास चखने की दुआ लगे। 😊 तुमने ठोकर मारने को गलत पत्थर नहीं चुना एक जिद्दी अहल्या ने तुम्हारे स्पर्श को वर दिया है। आबाद रहो मेरे सागर💐

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