कल्पनापूरा संग्रह

रचना 146 / 789

उसकी प्रतीक्षा में समय घड़ी से निकल कर खिड़की ,दरवाज़े या छत प…

उसकी प्रतीक्षा में समय घड़ी से निकल कर खिड़की ,दरवाज़े या छत पर बैठ जाता है। जब यहाँ कहीं उसका मन नहीं लगता तो कागज़ पर लोटने लगता है। मेरे अप्रेमपत्र ... कागज़ पर नहीं.... थकी हुई प्रतीक्षा पर लिखे जाते हैं। *एक दूसरे की नब्ज़ हो कर देखते हैं। चलो इश्क़ में लफ्ज़ हो कर देखते हैं।

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