कल्पनापूरा संग्रह

रचना 148 / 789

चाकरी करे .....फक्र से

चाकरी करे .....फक्र से वजूद ......गला दे "औरत" में .....कुव्वत है किसी और में हो ....तो बता दे !

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह