कल्पनापूरा संग्रह

रचना 160 / 789

कोई और होता तो कब का छोड़ दिया होता पर जाने क्या बात है

कोई और होता तो कब का छोड़ दिया होता पर जाने क्या बात है.... ईश्वर को ये कहकर मनाती रहती हूं कि एक रोज़ मेरे हिस्से में आना ....जब तुम चाहो। मेरी खुशी तुम से है। मैं रहूंगी सदा। तुमको रखूंगी सदा।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह