बहुत बहुत आभार शशि लता maam और Raghawendra Pandey जी आपने…
बहुत बहुत आभार शशि लता maam और Raghawendra Pandey जी आपने इतने सुंदर कार्यक्रम का हिस्सा मुझे बनाया। प्रकाशन विभाग ,सूचना भवन में हुए इस कार्यक्रम में बेहद सादगी भरे माहौल में कविता पाठ किया गया। हिन्दी को अब शान भाषा बनाने का समय आ गया है। हिन्दी एक विशेष भाषा है पर जिस गति से बोलचाल में मिलावट और हल्कापन अब देखने को मिलता है और जिस गति से नई पीढ़ी इस सरल सी भाषा से दूरी बना रही ,वो दिन दूर नहीं जब ये एक शेष भाषा रह जायेगी। ओए, अबे,अरे जैसी शैली के बीच हिन्दी में एक सही वाक्य बोल पाना या लिख पाना मुश्किल होता जा रहा। आज बच्चे हिन्दी लिखने से कन्नी काटते हैं। ये सच में चिंता का विषय है। अंग्रेजी का सम्मान भी ठीक है पर वंदना हिन्दी की ही होनी चाहिए। हमारी असली शान पहचान वही है। *कुछ स्वरचित कुछ अन्य कविताओं का पाठ किया गया। मैंने एक गीत और अपनी कविता काश सुनाकर अपना हिस्सा जी लिया। दिन वाकई मन का रहा।