कल्पनापूरा संग्रह

रचना 168 / 789

जिंदगी मुझे कितनी भर चाहिए

जिंदगी मुझे कितनी भर चाहिए ? जितनी भर चूमी जा सके और उतनी भर भी जितनी चूम कर छोड़ी जा सके... फिर चूमने के लिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह