कल्पनापूरा संग्रह

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प्रेम में प्रेम नहीं उसकी विवशता थका देती है।

प्रेम में प्रेम नहीं उसकी विवशता थका देती है। जिसके लिए दुखना अच्छा लगे और झुकना भी वही थकान तुम हो। मेरा प्रिय दुःख

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