कल्पनापूरा संग्रह

रचना 175 / 789

झूठ कहते हैं लोग.... प्रेम दो लोगों के बीच होता है ।

झूठ कहते हैं लोग.... प्रेम दो लोगों के बीच होता है । प्रेम तीन लोगों के बीच होता है तुम मैं और ईश्वर ईश्वर रेत घड़ी है... तुम और मैं रेत रेत का कम से ज्यादा ज्यादा से कम होते जाना प्रेम है। और रेत का रेतघड़ी में भरे रहना ईश्वर का हम दोनों के ठीक मध्य होना । इसे समझा नहीं सकते... दिखा सकते हैं। देखो.... देखते रहो.... हम तीनों को

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