कल्पनापूरा संग्रह

रचना 180 / 789

बदल गए हो

बदल गए हो ...... बेहद खूबसूरत हो गए हो और बुलंद भी ... मुझमें हाथ पकड़ कर .....हौले से करीब ....बेहद करीब आकर "अतीत" ने ..... "आज" से कहा मैंने *तुम* से कहा...

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह